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Friday, 27 October 2017

आज की माइक्रोफिक्शन

कबाब में हड्डी

शांत पानी में टकटकी लगाये वो देख रहा था। वो भी पानी से उसको ललचा रही थी। आंखो आंखो में प्यार हो गया। वो हल्के से मुस्कुराया तभी अचानक..."छपाक"... मेंढक उछल के पानी में गीरा और वो चली गई। उसे इतना गुस्सा आया की मेंढक को मार ही डाले मगर जब नज़र बाजुओ पर गइ तो गुस्सा भाप बन के आंसुओ को सुलगाने लगा था।

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गोपाल खेताणी

Thursday, 26 October 2017

आज की माइक्रोफिक्शन

हवा

"किधर?"
"बच्चों के लिए हवा बचाने जा रहा हुं।"
हाथ में नीम के पौधे ले के वो जा रहा था। सही मायनोमें वो अनपढ नहीं था!

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गोपाल खेताणी


Wednesday, 25 October 2017

आज की माइक्रोफिक्शन

वो

ट्रीगर पर रखी उंगली पे वो अपनी गर्म सांसे छोड रहा था। अंधेरेमें भी उसकी बाझ नजर किसी को ढूंढ रही थी। पास में बैठा कालु भी उर्जा बचाने अपनी जबान बहार कम ही नीकाल रहा था। दोनों को शिकार की तलाश थी।
कुछ गीरने की आवाझ आई। कालु झपका, अपनी पूंछ हिलाइ, जबान निकाली.. और इस चक्कर में नझर हटी । दुसरे दीन पुलिस को कुत्ता बेहोश मिला। लाश के हाथ में पिस्टल थी, छाती पर कातिलाना घाव, होठों पर मुस्कान और गालों पर लिप्स्टीक के निशान!

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गोपाल खेताणी

परमवीर चक्र विजेता अब्दुल हमीद

अब्दुल हमीद   का जन्म  1 जुलाई , 1933 को   यूपी के गाजीपुर जिले के धरमपुर गांव में   हुआ था।   उनके पिता मोहम्मद उस्मान सिलाई का काम करते थे...